रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी भर्तियों को लेकर अक्सर होने वाले विवादों के बीच छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) ने ‘निरीक्षक वाष्पयंत्र परीक्षा-2024’ (Boiler Inspector Exam) को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। आयोग ने एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर भर्ती प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों का कड़ा जवाब दिया है। PSC का कहना है कि पूरी चयन प्रक्रिया निर्धारित नियमों के दायरे में रहकर पूरी की गई है और सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह से तथ्यहीन और भ्रामक हैं।
क्या है पूरा विवाद?
हाल ही में बॉयलर इंस्पेक्टर पद पर हुई नियुक्तियों को लेकर छत्तीसगढ़ में राजनीतिक माहौल गरमा गया था। भाजपा नेता गौरीशंकर श्रीवास ने राज्यपाल को पत्र लिखकर इस भर्ती में भारी अनियमितता के आरोप लगाए थे। उन्होंने मुख्य रूप से चयनित अभ्यर्थी कानन वर्मा की नियुक्ति पर सवाल उठाए थे। आरोपों में कहा गया था कि अभ्यर्थी की आयु निर्धारित सीमा से अधिक थी और चयन प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी कर रसूखदारों को फायदा पहुँचाया गया।
आयु सीमा और पारदर्शिता पर PSC का जवाब
आयोग ने 3 मार्च 2026 को जारी अपने स्पष्टीकरण में कहा कि निरीक्षक वाष्पयंत्र परीक्षा सहित आयोग द्वारा निकाली जाने वाली सभी भर्तियों में विज्ञापन के नियमों का अक्षरशः पालन किया जाता है।
आयोग ने मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर सफाई दी:
- आयु सीमा का निर्धारण: PSC के अनुसार, दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) के समय प्रचलित नियमों और छूट के आधार पर ही अधिकतम आयु सीमा का आकलन किया गया है। किसी भी अयोग्य व्यक्ति को आयु में गलत तरीके से राहत नहीं दी गई है।
- सदस्यों से संबंधों का खंडन: आयोग ने सबसे महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण ‘पारिवारिक संबंधों’ को लेकर दिया। PSC ने स्पष्ट किया कि चयनित प्रथम अभ्यर्थी का आयोग के किसी भी सदस्य के साथ कोई पारिवारिक संबंध नहीं है। सदस्यों के नाम का उपयोग कर चयन प्रक्रिया को संदिग्ध बनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
कोर्ट के आदेशों का होगा पालन
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने यह भी स्वीकार किया कि इस भर्ती से संबंधित मामला वर्तमान में माननीय उच्च न्यायालय (High Court) में विचाराधीन है। आयोग ने कहा कि वह कानून का सम्मान करता है और न्यायालय द्वारा जो भी आदेश दिए जाएंगे, उसी के अनुरूप भविष्य की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
विपक्ष के आरोपों से गरमाई सियासत
बता दें कि भाजपा नेता गौरीशंकर श्रीवास ने केवल अभ्यर्थी पर ही नहीं, बल्कि आयोग के तीन सदस्यों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए थे। उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए इसे प्रदेश के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया था। हालांकि, PSC के इस आधिकारिक बयान के बाद अब गेंद सरकार और न्यायालय के पाले में है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में पीएससी की साख पहले भी कई बार सवालों के घेरे में रही है, ऐसे में आयोग का यह त्वरित और विस्तृत स्पष्टीकरण युवाओं के बीच विश्वास बहाली की एक कोशिश माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि न्यायालय इस मामले में क्या रुख अपनाता है।










