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JEE Advanced में क्रांतिकारी बदलाव: रटने की विद्या नहीं, अब ‘दिमाग’ से तय होगी सफलता

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा ‘जेईई एडवांस’ (JEE Advanced) अब एक नए अवतार में नजर आने वाली है। आईआईटी कानपुर एक ऐसे आधुनिक परीक्षा ढांचे पर काम कर रहा है, जो न केवल छात्रों के तनाव को कम करेगा, बल्कि उनकी वास्तविक तार्किक क्षमता का सटीक आकलन भी करेगा। इस नए बदलाव को ‘एडेप्टिव एप्टीट्यूड टेस्ट’ (Adaptive Aptitude Test) का नाम दिया जा रहा है।

क्या है यह नया ‘एडेप्टिव’ फॉर्मेट?

​वर्तमान परीक्षा प्रणाली में सभी छात्रों के सामने एक जैसे प्रश्न होते हैं, चाहे उनकी तैयारी का स्तर कुछ भी हो। लेकिन प्रस्तावित नए फॉर्मेट में परीक्षा का सॉफ्टवेयर छात्र के पिछले उत्तर के आधार पर अगला प्रश्न तय करेगा।

​इस प्रक्रिया को इस प्रकार समझा जा सकता है:

  1. ​यदि कोई छात्र किसी कठिन प्रश्न का सही उत्तर देता है, तो अगला प्रश्न उससे भी अधिक चुनौतीपूर्ण (कठिन) होगा।
  2. ​इसके विपरीत, यदि छात्र किसी प्रश्न को हल करने में विफल रहता है, तो सिस्टम स्वतः ही अगला प्रश्न थोड़ा सरल कर देगा।

​इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य छात्र की ‘वास्तविक दक्षता’ का पता लगाना है। इससे परीक्षा अधिक संतुलित होगी और यह सुनिश्चित होगा कि छात्र केवल भाग्य या तुक्के के भरोसे नहीं, बल्कि अपनी बुद्धिमत्ता के आधार पर रैंक प्राप्त करें।

कोचिंग कल्चर पर लगेगा लगाम

​आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल लंबे समय से मौजूदा परीक्षा प्रणाली में सुधार की वकालत करते रहे हैं। उनका मानना है कि वर्तमान में जेईई की तैयारी एक रटंत प्रणाली (Rote Learning) और भारी-भरकम कोचिंग सेंटरों के इर्द-गिर्द सिमट गई है।

​नया एप्टीट्यूड टेस्ट फॉर्मेट आने से कोचिंग संस्थानों की ‘शॉर्टकट ट्रिक्स’ और ‘फॉर्मूला रटने’ की तकनीकें बेअसर हो सकती हैं। परीक्षा में अब तार्किक क्षमता (Logical Reasoning), गहरी समझ (Conceptual Understanding) और समस्या समाधान (Problem Solving) कौशल को अधिक महत्व दिया जाएगा।

आईआईटी काउंसिल की मंजूरी और पारदर्शिता

​आईआईटी की सर्वोच्च नीति निर्धारण संस्था, ‘आईआईटी काउंसिल’ ने इस मॉडल पर गंभीरता से विचार शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस डिजिटल बदलाव से चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और प्रभावी बनेगी। चूंकि हर छात्र का प्रश्न पत्र उसकी क्षमता के अनुसार गतिशील (Dynamic) होगा, इसलिए नकल या पेपर लीक जैसी संभावनाओं को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

कब से लागू होगी नई व्यवस्था?

​फिलहाल यह प्रोजेक्ट टेस्टिंग फेज (Testing Phase) में है। आईआईटी कानपुर इसे एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू करने की तैयारी में है। यदि यह परीक्षण सफल रहता है और विभिन्न नियामक निकायों से मंजूरी मिल जाती है, तो अगले साल (2027) से जेईई एडवांस की परीक्षा इसी नए ‘एडेप्टिव’ पैटर्न पर आधारित हो सकती है।

निष्कर्ष: छात्रों के लिए क्या बदलेगा?

​छात्रों के लिए यह खबर राहत भरी भी है और चुनौतीपूर्ण भी। राहत इस बात की है कि एक कठिन सवाल न आने पर उनका मनोबल नहीं गिरेगा, क्योंकि अगला सवाल उनकी क्षमता के अनुसार आएगा। चुनौती यह है कि अब केवल किताबों को रटकर आईआईटी में जगह बनाना मुमकिन नहीं होगा।

प्रो. मणींद्र अग्रवाल (निदेशक, IIT कानपुर) के अनुसार, “यह फॉर्मेट अभी टेस्टिंग प्रक्रिया में है। इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पेश किया जाएगा और निश्चित रूप से इससे छात्रों को अपनी वास्तविक प्रतिभा दिखाने का बेहतर अवसर मिलेगा।”

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