जयपुर। राजस्थान की सबसे विवादित भर्तियों में से एक ‘सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती 2021’ एक बार फिर सुर्खियों में है। राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द किए जाने के फैसले के बाद अब यह मामला देश की सर्वोच्च अदालत, सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुँच गया है। चयनित अभ्यर्थियों ने अपने भविष्य को बचाने के लिए स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) दाखिल की है, जिस पर मई के दूसरे सप्ताह में सुनवाई होने की संभावना है।
क्यों रद्द हुई थी पूरी भर्ती प्रक्रिया?
राजस्थान पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पदों के लिए आयोजित इस परीक्षा पर शुरुआत से ही सवाल खड़े हो रहे थे। पेपर लीक, डमी कैंडिडेट और परीक्षा केंद्रों पर हुई भारी अनियमितताओं के आरोपों के बाद मामला हाईकोर्ट पहुँचा था। विस्तृत सुनवाई और जांच रिपोर्टों के आधार पर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने भर्ती को निरस्त करने का आदेश दिया था। बाद में खंडपीठ ने भी एकलपीठ के निर्णय को बरकरार रखते हुए भर्ती को रद्द कर दिया, जिससे करीब 800 से अधिक चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर संकट खड़ा हो गया।
चयनित अभ्यर्थियों का तर्क: “दोषियों को सजा दें, ईमानदारों को नहीं”
सुप्रीम कोर्ट पहुँचे अभ्यर्थियों का नेतृत्व कर रहे प्रतिनिधियों का कहना है कि उन्होंने अपनी मेहनत और ईमानदारी के दम पर यह सफलता हासिल की है। उनकी मुख्य दलीलें निम्नलिखित हैं:
- सामूहिक सजा गलत: यदि परीक्षा में कुछ प्रतिशत लोगों ने अनुचित साधनों का प्रयोग किया है, तो उसके लिए पूरी भर्ती रद्द करना उन हजारों छात्रों के साथ अन्याय है जिन्होंने निष्पक्ष रूप से परीक्षा दी।
- दोषियों की पहचान: प्रशासन को केवल उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए जो गड़बड़ी में शामिल थे, न कि पूरी प्रक्रिया को खत्म करना चाहिए।
- कैरियर का सवाल: नियुक्ति के करीब पहुँच चुके अभ्यर्थियों के लिए अब नई शुरुआत करना मानसिक और आर्थिक रूप से कठिन है।
कैवियट दाखिल: दोनों पक्षों को मिलेगी सुनवाई
दूसरी ओर, जो अभ्यर्थी इस भर्ती में सफल नहीं हो पाए थे या जिन्होंने धांधली का विरोध किया था, वे भी सतर्क हैं। अचयनित अभ्यर्थियों की ओर से एडवोकेट हरेंद्र नील ने सुप्रीम कोर्ट में ‘कैवियट’ दाखिल की है। इसका मतलब यह है कि अदालत चयनित अभ्यर्थियों की एसएलपी पर कोई भी एकतरफा आदेश पारित नहीं करेगी; कोई भी निर्णय लेने से पहले दूसरे पक्ष (अचयनित अभ्यर्थियों) की बात भी सुनी जाएगी।
मई 2026 के दूसरे सप्ताह पर टिकी निगाहें
सूत्रों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट इस संवेदनशील मामले को प्राथमिकता पर ले सकता है। मई 2026 के दूसरे सप्ताह में इस पर पहली बड़ी सुनवाई होने की उम्मीद है। इस दिन कोर्ट यह तय कर सकता है कि हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई जाए या नहीं।
प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल
राजस्थान सरकार और पुलिस विभाग के लिए भी यह फैसला काफी अहम होगा। एक तरफ विभाग में अधिकारियों की कमी है, वहीं दूसरी तरफ पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का दबाव है। सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आएगा, वह राजस्थान में भविष्य में होने वाली अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी एक ‘नजीर’ (Precedent) साबित होगा।









